गलवान घाटी विवाद क्या है?

By | July 13, 2020

गलवान घाटी विवाद क्या है?

पिछले कुछ महीनों से गलवान घाटी विवाद प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की सुर्खियों में है। बहुत मुमकिन है कि आपने इसके बारे में सुना होगा। गलवान घाटी विवाद क्या है? हम इसे  आसान भाषा में समझने की कोशिश करेंगे। इस पूरे विवाद को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे चलना होगा।

गलवान घाटी विवाद क्या है? 1 गलवान घाटी विवाद क्या है?

गलवान घाटी का मैप

भारत की आजा़दी से पहले भारत और तिब्बत के बीच सन् 1914 में अंग्रेजों ने एक सीमा का निर्धारण किया जिसे हम मैकमोहन लाइन के नाम से जानते हैं। मैकमोहन लाइन का निर्धारण सर हेनरी मैकमोहन के द्वारा शिमला समझौते के तहत  किया गया था। जो उस समय ब्रिटिश हुकुमत में विदेश सचिव थे।

1950 के दशक में जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया तो मैकमोहन लाइन को मानने से इंकार कर दिया। चीन के अनुसार तिब्बत कोई स्वायत्त राज्य नहीं था, इस कारण उसे संधि करने का कोई अधिकार नहीं था।

साल 1962 तक यही स्थिति रही। लेकिन जब 1962 में चीन ने भारत के एक एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। जिसे आज अक्साई चिन कहा जाता है। वर्तमान में यह क्षेत्र लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में आता है। युद्ध विराम के बाद एक नयी लाइन पर बात बनी जिसे LAC (Line of actual control) यानि वास्तविक नियंत्रण रेखा कहा गया। तकरीबन 4047 किमी0 लम्बी यह सीमारेखा लद्दाख, कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है।

 

इस साल यानि 2020 के मई महीने की शुरुआत में  कुछ चीनी सैनिकों ने पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में अपने अस्थाई टेंट लगा लिए। जब भारतीय सैनिकों के द्वारा इसका विरोध किया गया तो उन्होंने हमला कर दिया। यह हमला धोखे से अचानक किया गया। जिसमें बीस भारतीय सैनिक शहीद हो गए। बदले में भारतीय सैनिकों की जवाबी कार्रवाई में 43 चीनी सैनिक मारे गए।  

लेकिन चीनी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की। वजह इससे चीन और दुनिया के बाकी मुल्कों में चीन की शाख पर असर पड़ सकता था। भारत – चीन सीमा पर 45 साल बाद यह कोई हिंसक झड़प हुई थी।
पूरे विवाद का कारण चीन की विस्तारवादी नीति है। आपको बता दें इस समय चीन का 23 देशों के साथ सीमा विवाद चल रहा है।

कई दौर की बातचीत और अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कठोर कार्रवाई की घोषणा के बाद चीनी सैनिकों को वापस जाना पड़ा। इस विवाद में अमेरिका, रूस, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का सहयोग मिला। कोविड-19 के कारण पूरी दुनिया में चीन की साख गिरी है, साथ ही दुनिया के तमाम देशों में भारत का समर्थन बढ़ा है।

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गलवान घाटी की कहां स्थित है?

जिस गलवान घाटी को लेकर विवाद है, वह गलवान नदी काराकोरम पर्वत श्रृंखला से निकलती है। अक्साई चिन और पूर्वी लद्दाख से होते हुए तकरीबन 80 किमी का सफ़र पूरी करने के बाद यह सिंधु की सहायक श्योक नदी में मिल जाती है। इसी गलवान नदी की घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच गलवान घाटी विवाद है।

कौन हैं गलवान? जिनके नाम पर इस घाटी का नाम रखा गया है?

गलवान घाटी विवाद क्या है?

रसूल गलवान

इस नदी का नाम रसूल गलवान के नाम पर रखा गया था जो लद्दाख के रहने वाले थे। छोटी उम्र से ही उन्हें साहसिक यात्राएं  करने का शौक था।

पूर्वी लद्दाख क्षेत्र की इस घाटी के बारे में रसूल गलवान को जानकारी थी। उनकी एक किताब है  Sarvent of Sahibs जिसमें उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में उन्हें अंग्रेजों के दल के साथ गाइड के तौर पर जाने का मौका मिला। इस किताब की भूमिका यानि Introduction सर फ्रांसिस यंगहसबैंड ने लिखी थी। जो तत्कालीन ब्रिटिश सेना में एक सैन्य अधिकारी थे।

उनका जन्म सन् 1878 के आसपास हुआ था। उनकी मां ने उन्हें अकेले पाला-पोसा था। थोड़ा बड़े होने पर रसूल गलवान यूरोप से आने वाले पर्यटकों के दल से गाइड के तौर पर काम करने लगे।

उन्होनें कुछ प्रसिद्द व्यक्तियों के साथ भी काम किया, जिनमें मेज़र गॉडविन ऑस्टिन प्रमुख थे। इन्हीं के नाम पर माउन्ट गॉडविन ऑस्टिन कहा जाता है। गॉडविन ने ही काराकोरम पर्वत श्रृंखला की ऊंचाई मापी थी।

साल 1892 में जब चार्ल्स मरे डनमोर भारत आए तो 14 साल के गलवान उनके सहायक थे। इस यात्रा के दौरान उनका काफिला फंस गया। वहां सिर्फ ऊंचे पहाड़ और सामने बहती नदी थी। ऐसे हालात में रसूल गलवान ने पूरे दल को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

इस घटना से चार्ल्स इतने प्रभावित हुए कि उस जगह का नाम गलवान नाला कर दिया। जो बाद में गलवान घाटी के नाम से जानी जाने लगी जो आजकल गलवान घाटी विवाद के नाम से ट्रेंड कर रही है।

गलवानों का इतिहास

लद्दाखी इतिहासकारों के अनुसार गलवान कश्मीर की एक जनजाति थी। जो राजा के यहां घोड़े और टट्टू चराने का काम करते थे। एक दिन एक कुछ गलवानों ने राजा का घोड़ा चुरा लिया। इनमें से एक था कर्रा गलवान।

कर्रा का मतलब काला और गलवान का मतलब था लुटेरा। बाद में कर्रा पकड़ा गया लेकिन उसके परिवार के लोग पकड़े जाने के डर से लद्दाख भाग गये। बाद के दिनों में गलवानों ने घोड़े चुराने को व्यवसाय के रूप में अपना लिया। गलवानों की पूरी जनजाति ही अब घोड़े चुराने के लिए कुख्यात हो गयी।

रसूल गलवान इन्हीं लद्दाखी गलवानों में से एक थे। तकरीबन 35 साल की अपनी घुमक्कड़ ज़िन्दगी में रसूल गलवान ने अंग्रेजी, उर्दू, लद्दाखी और तुर्की जैसी भाषाएं सीख ली थी। Servent of Sahibs उनकी टूटी-फूटी अंग्रेजी एक बानगी है। 

 

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धन्यवाद #Rj Vivek

 

 

20 thoughts on “गलवान घाटी विवाद क्या है?

  1. Mudit Shah

    धन्यवाद विवेक जी रोचक और सरल तरीके से सम-सामायिक विषय को रखने के लिए

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    1. Vivek Singh Post author

      धन्यवाद भैया। आपका स्नेह है। कुछ अच्छा करने का प्रयास हैं बस।

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  2. Aanchal Singh

    A great explanation of each and every topic of Galwan Valley. Writing skill as well as content both are effective.👌

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  3. Santosh Kumar Singh

    Good keep it up. Waiting for new interesting informations.👍

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    1. Vivek Singh Post author

      शुक्रिया।आप सभी की हौसलाफजाई के लिए।

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  4. INDRAJIT

    Very nice initiative too much information included with this write-up.

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    1. Vivek Singh Post author

      धन्यवाद दोस्त। आप चाहें तो अपने विचार हिंदी में भी रख सकते हैं।

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  5. अमित प्रकाश तिवारी

    बेहतरीन । सरल शब्दों में आपने गलवान घाटी के इतिहास का यात्रा कराया। थैंक्स विवेक भाई।

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    1. Vivek Singh Post author

      कोरोना से मुक्ति मिले तो यात्रा भी करवाते हैं मित्र।

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  6. दीपक चंदेल

    काफी अच्छी एवं समसामयिक जानकारी को सटीक तथ्यों के साथ रखने के लिए धन्यवाद।

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  7. अजीत चौधरी

    सरल भाषा मे इतनी अच्छी जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद विवेक जी।

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    1. Vivek Singh Post author

      धन्यवाद भैया। सब आपका स्नेह है।

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