धारचूला पर्यटन स्थलः2020,ओम पर्वत का बेसकैंप

By | April 16, 2020

धारचूला पर्यटन स्थलः 2020

 

धारचूला पर्यटन स्थल

उत्तराखंड का धारचूला पर्यटन स्थल कितना सुकून समेट कर बैठा अपनी वादियों में इसका एहसास सिर्फ वहां जाने पर ही हो सकता है।हम आदि कैलाश ओम् पर्वत का बेसकैंप कहे जाने वाले धारचूला पर्यटन स्थल की ही बात कर रहे हैं। जैसे ही लगता है बहुुत कुछ देख-सुन और जान लिया, फिर अचानक से कोई और चोटी या वादी बुला लेती है अपनी आगोश में। यहां कदम-2 पर खूबसूरती इस कदर बिखरी है कि आंखे हमेशा के लिए कैद कर लेना चाहती हैं उन लम्हों को, उन तस्वीरों को, जो कुदरत ने अपने कैनवास पर उकेरी हैं।

इस बार mysolotraveler.com आपके लिए धारचूला पर्यटन स्थल की खूबियों के साथ आया है। धारचूला पर्यटन स्थल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले क एक छोटा सा हिल स्टेशन है। लेकिन सिर्फ क्षेत्रफल के लिहाज से छोटा है, खूबसूरत इतना कि बस देखते ही रह जाएं।

आमतौर पर हिल स्टेशनों पर हम जिस सुकून और इत्मिनान के लिए जाते हैं वो नदारद मिलती हैं। वज़ह साल भर पर्यटकों की भीड़भाड़ अपेक्षाकृत ज्यादा जाने वाले  स्थानों पर रहती है। ऐसे में ज़ेहनी सुकून की उम्मीद करना बेमानी है।

लेकिन हम आपको यकीन दिलाते हैं धारचूला आकर आप ख़ुद को प्रकृति के बेहद करीब महसूस करेंगे। धारचूला को यदि सुकून का दूसरा नाम कहें तो गलत नहींं होगा। ऐसा यहां आने वालों का दावा है।

पिथौरागढ़ से सिर्फ 90 किमी की दूरी पर स्थित धारचुला पर्यटन स्थल चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। सागर तल से 950 मी0 की ऊँचाई पर स्थित धारचुला हिन्दी के दो शब्दों धार और चुला से मिलकर बना है। धार का मतलब चोटी और चुला का चुल्हा या स्टोव। दूर से इस पहाड़ी का आकार स्टोव या चूल्हे जैसा दिखाई पड़ता है। इसी वजह से इसका नाम धारचूला पड़ा है।

तकरीबन 66 हज़ार की आबादी वाले इस हिल स्टेशन में हिन्दी आधिकारिक भाषा के तौर पर इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा कुँमाऊंनी और अन्य स्थानीय बोलियां बोली जाती हैं। धारचुला के पश्चिचम मेे पश्चिमचुली चोटी इस क्षेत्र को जौहर घाटी से अलग करती हैं।   

धारचुला के आसपास दर्शनीय स्थलः

चिरकिला डैम काली नदी

चिरकिला डैम काली नदी

                                                                                  

काली नदी धारचूला

समुद्र तल से 3600 मी की ऊंचाई पर स्थित काली नदी न सिर्फ भारत और नेपाल के बीच सीमा निर्धारित करती है बल्कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच भी सीमारेखा का काम करती है। काली नदी को ही यूपी में शारदा नदी के नाम से जाना जाता है। यह आगे चलकर जौलजेबी में गोरी गंगा में खुद को समाहित कर लेती है। जौलजेबी में ही काली और गोेरी गंगा नदी के संगम पर हर साल नवंबर माह में वार्षिक मेला लगता है। जिसमे देश भर से लोग आते हैं। काली नदी पर बनाया गया चिरकिला बांध पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र रहता है।

धारचूला पर्यटन स्थलः2020,ओम पर्वत का बेसकैंप 1 धारचूला पर्यटन स्थलः2020,ओम पर्वत का बेसकैंप

                                                                     ओम् पर्वत या आदि कैलाश पर्वत

ओम् पर्वतः

हिंदू मान्यता के अनुसार दुनिया में कुल आठ ओम् पर्वत हैं। ओम् पर्वत यानि को वे पर्वत जिन पर बर्फ इस तरह गिरती है कि प्राकृतिक रूप से ऊँ की आकृति बन जाए। धारचुला के पास स्थित ओम् पर्वत इनमें से एक है, इसकी ऊंचाई 6191 मी0 है। 

हिंदुओं के अलावा बौद्ध और जैन धर्म में भी ओम् पर्वत का विशेष स्थान है। इस पर्वत को लेकर नेपाल और भारत के बीच सीमा विवाद है। पहाड़ पर ऊँ भारत की तरफ से दिखता है जबकि इसका पिछला भाग नेपाल की तरफ है।

कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्री धारचूला से पहले गूंची जाते हैं फिर वहां से ओम् पर्वत फिर वापस गूंची से कैलाश के लिए प्रस्थान करते हैं। ओम् पर्वत की यात्रा के दौरान हिमालय के उन प्रसिद्द  शिखरों के दर्शन आसानी से हो जाते हैं जो नेपाल या पिथौरागढ़ की सीमा में आते हैं।

नहीं चढ़ पाया है कोई पर्वतारोही दल पवित्र ओम् पर्वत पर

पवित्र ओम् पर्वत पर पर्वतारोहियों के कई दलों ने चढ़ाई की कोशिश की लेकिन कोई सफल नहीं हो पाया। ब्रिटिश और भारतीयों के एक दल ने पर्वत की धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए 30 फीट दूर ही रुक जाने का फैसला किया। ओम् पर्वत से आदि कैलाश की दूरी लगभग 26 किमी की है। भारत से कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्री लिपुलेख दर्रे के नीचे बने बेस कैंप से इस पर्वत का दर्शन कर सकते हैं।

यहां यात्रा करने वाले पर्यटकों के अनुसार ओम् पर्वत के पास सर्दियों में बर्फ गिरने के समय ओम् की ध्वनि सुनी जा सकती है। इसी ओम् पर्वत को उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुवों का केन्द्र माना जाता है। आसान शब्दों में इस पर्वत से दोनों ध्रुवों के बीच की दूरी बराबर है। वैज्ञानिकों के अनुसार चुम्बकीय तरंगों के कारण ओम् जैसी ध्वनि सुनाई देती है। जबकि शिवभक्त इसे भगवान शिव का प्रताप मानते हैं।

धारचूला कब जाएं…?

धारचुला जाने के लिए सबसे मुफ़ीद मौसम मानसून के बाद और सर्दियों की शुरुआत से पहले है। मानसून के दिनों में लैंड स्लाइडिंग की वजह से पहाड़ों पर जाना सुरक्षित नहीं होता है। लेकिन मानसून के बाद मौसम बेहद खुशनुमा होता है। जाड़ों में गिरने वाली बर्फ से रास्ते बंद होे जाते हैं। गर्मियों के मौसम में यहां काफी गर्मी पड़ती है। इस वजह से सितंबर के बाद और दिसम्बर के पहले जाना सबसे अच्छा माना जाता है।

 कैसे पहुंचें धारचूला पर्यटन स्थल..?

धारचुला जाने के लिए निकटतम एयरपोर्ट  उत्तराखंड का पंत नगर है जो कि 305 किमी की दूरी पर स्थित है। यदि आप ट्रेन के जरिए यहां पहुंचना चाहते हैं तो काठगोदाम से धारचुला  पर्यटन स्थल की दूरी 287 किमी है। इसके अलावा आप अपने साधन से भी धारचुला पहुंच सकते हैं।

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photo credit-Sachin Firmal

6 thoughts on “धारचूला पर्यटन स्थलः2020,ओम पर्वत का बेसकैंप

  1. Rishu kumar

    I really feel like that just I have attached the place.
    Thank you so much vivek sir kinds of information from your blog mysolotraveler

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