स्वामी विवेकानन्द जयंती 2021

By | January 12, 2021

स्वामी विवेकानन्द जयंती 2021

विवेकानन्द कल आज और कल (12 जनवरी राष्ट्रीय युवा दिवस  पर विशेष) स्वामी विवेकानन्द जयंती 2021 पर विशेष

“असहाय अनुभव करना भारी भूल है। किसी से सहायता की याचना मत करो। अपने सहायक हम स्वयं हैं।”

स्वामी विवेकानन्द जयंती 2021

                                                                     स्वामी विवेकानन्द जयंती 2021

ऐसी अनगिनत प्रेरक पंक्तियों के द्वारा न सिर्फ भारत बल्कि संसार के कितने देशों में व्यक्तियों के जीवन की दशा और दिशा बदलने वाले महामानव स्वामी विवेकानन्द के जन्मदिन की आप सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। स्वामी विवेकानन्द जयंती 2021 पर यह विशेष ब्लॉग स्वामी जी के प्रति अपनी श्रद्धा के कारण लिख रहा हूं। उम्मीद है आप सुधी पाठकों को पसंद आयेगा।

मैं आधुनिक भारत के तमाम ख्यातिलब्ध महापुरुषों में स्वयं को विवेकानन्द के बेहद करीब पाता हूँ । मेरी मां ने इन्हीं महापुरुष के नाम पर मेरा नाम विवेक रखा था, तब शायद उसे भी किंचित अनुमान नहीं रहा होगा कि आने वाले वर्षो में मैं अपने आदर्श के रूप मे विवेकानन्द का चुनाव करने वाला हूँ।

मेरे लिए स्वामी विवेकानन्द की जयंती का विशेष महत्व है। स्वामी जी ने भारत के उन महान ऋषियों में से एक हैं जिन्होने समूचे भारतवर्ष का पैदल भ्रमण किया था। यहां पैदल का तात्पर्य उस समय मिलने वाले साधनों का उपयोग भी शामिल था। लेकिन ज्यादातर यात्राएं उन्होने पैदल ही की थी। इस वजह से उन्हें भारत की भौगोलिक स्थिति और यहां क्षेत्र विशेष में होने वाली असुविधा के बारे में सामान्य लोगों से ज्यादा पता था।

उन्होने महात्मा बुद्ध, महावीर स्वामी, आदि शंकराचार्य और गुरू नानकदेव की परम्परा को आगे बढ़ाया। उनका शिकागो पहुंचना कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि घुमक्कडी़ की दिशा में मील का पत्थर था। जिस पर आने वाले दिनों में हिंदुत्व की नयी परिभाषा लिखी गयी। उन्होंने भारतीय होने पर गर्व होना सिखाया। अन्यथा अंग्रेजी हुकुमत के दौर में भारतीयों में हीन भावना चरम पर थी।

विवेकानन्द सर्वकालिक महान विभूतियों में अग्रणी हैं। जैसा कवियों की गणना के समय कालिदास को सबसे छोटी उंगली पर स्थान दिया गया।उसके बाद उनसे बड़ा कोई कवि न मिलने के कारण अनामिका अपने नाम को सार्थक करती है।

विवेकानन्द जितने प्रासंगिक कल थे, उससे अधिक आज हैं, निकट भविष्य में और भी अधिक होंगे। मेरे अनुसार स्वामी जी ज्ञान के क्षितिज हैं जिन्हें कभी छुआ नहीं जा सकता। हम क्षितिज के जितने पास जाते हैं उसकी सीमाओं में उतना ही विस्तार परिलक्षित होता है।

ऐसे महापुरुष को कोटि-२ नमन जिन्होंने हमें भारतीयता पर गर्व करना सिखाया। वे हमेशा कहते थे कि हमारी चीजों के बारे में जब कोई गोरी चमड़ी वाला कहता है तो उसे बड़े गर्व के साथ स्वीकार करते हैं किन्तु वही बातें हिन्दुस्तानी करे तो ध्यान नहीं देते।

प्रसिद्ध जर्मन विद्वान मैक्समूलर जब स्वामी जी से मिले तो उम्र मे छोटे होने पर भी उनके पैर छूकर आशीष लिया और जब स्वामी जी ने कारण पूछा तो मैक्समूलर ने कहा “मैं आपके रूप में भारत की उस महान सभ्यता में चरणों में नतमस्तक हूँ जिसके आप वाहक हैं।”

भारत मां के इस अमर सपूत को कोटिशः नमन।

यदि स्वामी विवेकानन्द को लेकर आपका कोई अनुभव है तो आप हमसे साझा कर सकते हैं। स्वामी जी हर पीढ़ी के लिए सदैव प्रासंगिक रहेंगे। आने वाली पीढ़ियां अपने विकास के लिए इस महामानव का अनुसरण करेंगी।
#Rj Vivek

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