Bahubali Prabhas adopts 1650 acres Kazipally forest

By | September 9, 2020

बाहुबली प्रभास ने 1650 एकड़ का खाजीपल्ली फॉरेस्ट रिजर्व लिया गोद

Bahubali Prabhas adopts 1650 acres Kazipally forest

Bahubali Prabhas adopts 1650 acres Kazipally forest reserve  की  खबर मेन स्ट्रीम मीडिया के लिए बहुत छोटी है। मेरे लिए एक पेड़ का बचाया जाना भी बड़ी बात है। लॉक डाउन के दौरान कुछ लोगों ने बहुत सराहनीय कार्य किया। इन्हीं में से एक बाहुबली फेम एक्टर प्रभास ने 1650 एकड़ का खाजीपल्ली फॉरेस्ट रिजर्व गोद लिया है। क्योंकि बाहुबली प्रभास ने जंगल का एक हिस्सा गोद लिया है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर बहुत बड़ी बात है। क्योंकि मैं जंगलों से प्यार करता हूं।

bahubali Prabhas adopts khazipally forest

बाहुबली प्रभास खाजीपल्ली फॉरेस्ट में

आखिर क्यों गोद लिया बाहुबली प्रभास ने खाजीपल्ली फॉरेस्ट रिजर्व

Bahubali Prabhas adopts 1650 acres Kazipally forest reserve

प्रभास के एक दोस्त हैं, जे. संतोष कुमार, TRS पार्टी से राज्य सभा सांसद। उनका एक इनिशिएटिव है- Green India Challenge. यह प्रधानमंत्री मोदी जी के स्वच्छ भारत अभियान जैसा ही है। जिसमें प्रभावशाली लोगों को जोड़ा जा रहा है।

प्रभास इस मुहीम से जुडे़ हुए हैं। इसी वजह से उन्होंने खाजीपल्ली फॉरेस्ट रिजर्व का एक हिस्सा गोद लिया है। इसके लिए प्रभास ने तेलंगाना वन विभाग के अधिकारियों को 2 करोड़ रू0 का चेक भी दिया है। इस मौके पर उनके दोस्त राज्य सभा सांसद जे. संतोष कुमार के अलावा तेलंगाना के फॉरेस्ट मिनिस्टर ए. आई. करन रेड्डी भी मौजूद थे। प्रभास और संतोष कुमार ने फाउंडेशन पत्थर रखा, साथ ही उन्होंने कुछ पौधे भी लगाए।

गोद लिया गया जंगल का हिस्सा प्रभास के पिता USV RAJU के नाम से जाना जाएगा। जंगल के इस हिस्से को अर्बन इको पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां लोगों को साफ़ हवा मिल सकेगी।

Living Root Bridge या जीवित पुल कहां हैं?

Bahubali Prabhas adopts 1650 acres Kazipally forest reserve में क्या खास बात है..

हैदराबाद से करीब 20 किमी0 दूरी पर एक जगह है, नाम है डंड़ीगल। यह हैदराबाद आउटर रिंग रोड के पास है। जो दोस्त हैदराबाद में रहते हैं या वहां जा चुके हैं, उनके लिए यह जानी पहचानी है। जब भी आप हैदराबाद जाएं तो यह फॉरेस्ट रिजर्व जरूर देखें। प्रभास के फैन के तौर पर ही सही।

खाजीपल्ली का यह जंगल तीन भागों में बांटा गया है। यह वास्तव में अपने औषधीय पौधों की वजह से प्रसिद्ध है। पूरा जंगल 1650 एकड़ में फैला हुआ है। औषधीय पौधों के संरक्षण के साथ ही दूसरे पेड़ों को भी बचाया जाएगा। इस मौके पर प्रभास ने कहा कि वह समय-2 पर यहां आते रहेंगे और कार्य के अनुसार और धनराशि भी देते रहेंगे।

गलवान घाटी विवाद क्या है?

प्रभास की इस ग्रीन इंडिया मुहीम का क्या फायदा होगा

क्योंकि प्रभास जैसे अभिनेताओं की लम्बी फैन फॉलोइंग है तो (Bahubali Prabhas adopts 1650 acres Kazipally forest)  उनके इस काम का लोगों के ऊपर फर्क पड़ना लाजमी है। मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर एक पेड़ का बचाया जाना भी बहुत बड़ी बात है। प्रभास और सांसद संतोष कुमार की इस मुहीम को सबका साथ मिलना चाहिए। कुछ लोग वास्तव में अच्छा करते हैं जैसे- अभिनेता सोनू सूद ने 2020 में अपनी अलग ही पहचान बना ली है।

पेड़ लगाना , बचाना, यह सिर्फ 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस तक ही नहीं सीमित रहना चाहिए। यह हम सभी की सामुहिक जिम्मेदारी है। नहीं तो सरकारें हर साल करोड़ों की संख्या में पौधे लगवाती हैं। उनका संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। मुश्किल नहीं है अगर हम सिर्फ एक पेड़ ही बचा पाएं तब भी अरबों की तादात में पेड़ बच जाएंगे।

इन सबके अलावा प्रभास अपने आने वाली फिल्म आदिपुरुष के लिए भी चर्चा में हैं। इस फिल्म में प्रभास भगवान राम के किरदार में नजर आने वाले हैं। वहीं सैफ अली खान लंकेश्वर के रूप में होंगे। बाहुबली प्रभास के चाहने वाले उनकी इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस आशा और उम्मीद के साथ कि जिस तरह आप प्रभास की फिल्मों को हिट करा देते हैं Green India initiative को भी अपना साथ देंगे।

क्या आप जानते हैं जंगल उगाने की मियावाकी तकनीक..

हमारे आपके जैसे साधारण लोग समझते हैं कि जंगल अपने आप ही उगते और बढ़ते हैं। एक हद तक यह सही भी है, लेकिन जंगल उगाने की एक जापानी तकनीक भी है, जिसे मियावाकी तकनीक कहते हैं। आमतौैर पर साधारण विधि से जंगल तैयार होने में 100-200 साल या ज्यादा का समय लग जाता है। लेकिन मियावाकी तकनीक से के केवल 20 से 30 साल में बेहद घना जंगल तैयार किया जा सकता है।

मियावाकी तकनीक के जन्मदाता मशहूर जापानी बॉटनिस्ट 93 साल के अकीरा मियावाकी हैं। मियावाकी Hiroshima University  के तौर पर कार्यरत थे।मियावकी को साल 1990 में Asahi Prize, 2006 में Blue Planet Prize से सम्मानित किया गया। उनके पास 10 लाख से भी अधिक बीज हैं। जो पूरी तरह से वर्गीकृत और पहचान वाले हैं। मियावाकी तकनीक से पौधे 10 गुना तेजी से और 30 गुना ज्यादा सघनता से तैयार होते हैं। इस विधि में स्थान विशेष के मूल प्रजाति के पौधों की पहचान की जाती है, फिर उन्हें चार भागों में बांट दिया जाता है।

  • झाड़ी (Shurb)
  • छोटे पेड़(Sub Tree)
  • पेड़
  • कैनोपी (Canopy)

इसके बाद पौधों को अलग-2 समय पर रोपा जाता है। यह प्रकिया 2 से 3 सप्ताह में पूरी हो जाती है। इस तरह से रोपे गये पौधे कम समय में पर्यावरण के लिहाज से जल्दी बड़े होकर मदद करते हैं।

मैं प्रभास और जे0 संतोष कुमार की Green India initiative  से पूरी तरह से सहमत हूं। मैंने करीब बीस से ज्यादा पौधे तैयार किये हैं। फिलहाल कुछ और पौधे लगाने का संकल्प किया है। आप भी इस मुहीम का हिस्सा बन सकते हैं। आपको सिर्फ एक पौधे को गोद लेना है। हो सके तो कुछ और लोगों को इस मुहीम से भी जोड़िए।

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धन्यवाद

4 thoughts on “Bahubali Prabhas adopts 1650 acres Kazipally forest

  1. Worship

    I shall contribute to GREEN INDIA INITIATIVE. And I think we should favour this.

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  2. Rishu kumar

    We should have to learn more about it and we should be that.
    Lovely information about #GREE_ INDIA_INITIATIVE

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