Banaras me kahan ghumen

By | October 11, 2020

बनारस में कहां घूमें / Banaras me kahan ghumen

वाराणसी शून्य किलोमीटर

रुकिए यदि आप बनारस  जा रहे हैं तो सबसे पहला सवाल जो आपके मन में आएगा कि बनारस में कहां घूमें.(Banaras me kahan ghumen) और क्या खाएं..

जवन मजा बनारस में
तवन न पेरिस, में न फारस में..

तो आज.. बनल रहे बनारस..

बनारस जाने वालों के लिए एक व्यस्त दिनचर्या ऐसी होनी चाहिए..

Banaras me kahan ghumen

                                                                                           वाराणसी शून्य किलोमीटर

ऐसे करें शुरुआत / सुबह का कार्यक्रम 

सुबह उठिए और जाके घाट पर गंगा मैया में डुबकी लगाइए। हर-हर गंगे का जयकारा लगाइए और वहां से बाबा के धाम यानि काशी विश्वनाथ के दरबार मे हाज़िरी लगाइए।
स्नान ध्यान के बाद अब पेट पूजा। तो बाबा के दर्शन के बाद बांस फाटक आइए, किसी से पूछकर मधुर जलपान गृह पहुंचिए और कचर के कचौड़ी-छोला- जलेबी तोड़िए। पानी मत पीजियेगा, क्योंकि वहां से निकलकर चौक वाले रास्ते पर थोड़ा चलकर एक गली में बाबा की मशहूर बनारसी ठंढई आपका इन्तजार कर रही है। गला तर कीजिए और महादेव का जयकारा लगाकर चलते बनिये।

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अब लगाइए हाजिरी काशी के कोतवाल के दरबार में

अब बनारस आकर बनारस के कोतवाल के दर पर हाज़िरी न लगाए तो क्या किया। इसलिए चौक से सीधे काशी कोतवाल काल भैरव के दर्शन के लिए निकल लीजिए। मैदागिन के पास संकरी गली में स्थित मंदिर में बाबा का आशीर्वाद लीजिए और काला गंडा गले मे बांध लीजिए। वहां से निकलते ही सामने मृत्युंजय महादेव मंदिर है, अनवरत 24 घण्टे चलने वाले मृत्युंजय मंत्र को महसूस कीजिए, बम भोले का आशीर्वाद लीजिए।

दोपहर में लीजिए खांटी पूर्वांचली बाटी-चोखा, देशी घी के साथ

अब दोपहर हो चुकी है तो अब पेट भूख से खदबदा रहा होगा। इसलिए वहां से अब सीधे सीधे सिगरा के लिए टेम्पो पकड़े और पहुँचे पल्लवी बाटी चोखा रेस्टुरेंट। वहां अब तक का दिव्यतम भोजन खाँटी पूर्वांचली बाटी चोखा दाल चावल घी चटनी का पूर्वांचली अंदाज में आनंद लीजिए। और अगर आनंद न आये और तृप्ति की डकार न निकले तो पूरा बनारस के ट्रिप का खर्च मेरी तरफ से।

वहां से निकलिए और संकट मोचन हनुमान के बालरूप का दर्शन कीजिये। दुर्गाकुंड पर माँ दुर्गा का आशीर्वाद लीजिये। मानस मन्दिर में तुलसी बाबा का अदृश्य साहचर्य लाभ लीजिये।

शाम गुजारिए अस्सी घाट पर

शाम हो गयी। अभी अस्सी घाट के पप्पू की चाय, अस्सी के पहलवान की लस्सी, अस्सी घाट के बनारसी गप्प का मज़ा लेना तो बकिये है। इस बीच दशास्वमेध के विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भी सम्मिलित होना है। वहां से निवृत्त होकर पहुंचिए अयर कैफे और बेहतरीन दक्षिण भारतीय सुपाच्य व्यंजन का स्वाद लीजिये।

अब भोजन के बाद कुछ मीठा चाहिए तो पहुंचिए प्रसिद्ध मिठाई की दुकान क्षीर सागर परऔर वहां स्पंजी रसगुल्ला दबाकर उड़ाइये। विश्वास रखिए , कलकत्ता का रसगुल्ला भूल जाएंगे। अब एक बीड़ा बनारसी मगही पान दबाइये और बनारसी अंदाज में उसे मुख में घुलने दीजिए और निकल लीजिए घाट की तरफ। गंगा मैया के किनारे घाट-घाट तफरी करते रहिए।

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अब जब थकान से शरीर चूर होने लगे तो गोदौलिया लक्सा रोड पर निकल आइये और वहां आपको दिखाई देगा कुल्हड़ में मलइयो। ध्यान रखिएगा, ये मलाई नही है, मलइयो है जो बनारस के अतिरिक्त आपको पूरे विश्व में नहीं मिलेगी। वस्तुतः यह दूध के झाग में केसर मिलाकर बनाया जाता है। एक दो कुल्हड़ मलइयो उड़ाइये और हर हर महादेव का उद्घोष करते हुए अपने रात के आशियाने की तरफ हो लीजिए।

हालांकि अभी भी बनारस पूरा का पूरा बचा हुआ है। कबीर बचे है, रविदास, बचे है,गोस्वामी तुलसी बाबा बचे है, मुंशी प्रेमचंदजयशंकर प्रसादआचार्य रामचंद्र शुक्ल भारतेंदु बाबू बचे BHU है,कलाभवन, नए विश्वनाथ मंदिर बचा है, काशी नगरी प्रचारिणी सभा बचा है और बचा है भगवान बुद्ध का सारनाथ, मूलगंध कुटी विहार, भारत गणराज्य का राजकीय चिन्ह अशोक चिन्ह…सब कुछ तो बचा है अभी।।

क्योंकि बनारस कभी खत्म नही होता। प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं: “बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।”

तो बनारस में कहां घूमें (Banaras me kahan ghumen) और क्या खाएं.. यकीनन आपको पसंद आया होगा। कंमेंट के माध्यम से हमें जरूर बताइये।

इस पोस्ट को हमारे लिए लिखा है डॉ0 आषुतोष राय ने गाजीपुर उ0 प्र0 से..

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धन्यवाद।

Rj Vivek Singh

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One thought on “Banaras me kahan ghumen

  1. Vikas Singh

    काशी के कोतवाल का विशेष जिक्र होना चाहिए था। उनके आशीर्वाद से पाठक से लेखक तक सबको लाभ होगा, हर हर महादेव।

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