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By | September 21, 2020

महाराणा कुम्भा का अजेय किला, कुम्भलगढ़, जहां है, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दीवार

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इतिहास की किताबों में जब राजस्थान के राजपुताने का जिक्र आता है, तो अपनी आन,बान,शान पर मर मिटने वाले राजपूत रणबांकुरों की तस्वीरें आंखों के सामने नुमाया हो जाती हैं। वीरता और बहादुरी का दुसरा नाम हैं राजपूत। इन योद्धाओं में महाराणा कुम्भा का नाम बहुत आदर से लिया जाता है। आमतौर पर जब हम भारत की कुछ चुनिंदा इमारतों के बारे में बात करते हैं, तब हम ताजमहल, लालकिला, फतेहपुर सीकरी में ही आकर ठिठक जाते हैं। क्योंकि हमें इतिहास के तौर पर किताबों में यही पढ़ाया जाता है।

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कुम्भलगढ़ किले का इतिहास / kumbhalgarh-fort-history-in-hindi

मुगलों की बनवाई गयी इमारतों के अलावा भी बहुत कुछ है हमारे देश में। जिस कुम्भलगढ़ किले की हम बात कर रहे हैं, उसको महाराणा कुंभा ने बनवाया था। महाराणा कुंभा का वास्तविक नाम महाराणा कुंभकर्ण था। जिन्हें लोग प्यार से महाराणा कुंभा कहते थे। साल 1443 ई0 में इस किले का निर्माण शुरू किया गया और इसके बनने में 15 साल लग गये। मतलब यह 1458 में बनकर तैयार हुआ।

बाहर से देखने पर शैम्पेन की बोतल के आकार का दिखने वाला यह किला राणा सांगा के खास वास्तुविद मंडन की देखरेख में बनाया गया था। मंडन शिल्पकला के उत्तमकोटि के विद्वान थे। इसके अतिरिक्त वे महाराणा कुम्भा के प्रमुख सलाहकारों में से एक थे। गेट के पास बोतल जैसे भाग में युध्द बंदियों को रखा जाता था। तस्वीर में दिखाई दे रहे गेट को राम पोल कहा जाता है।

इस तरह के कुल आठ द्वार या पोल कुंभलगढ़ किले में मौजूद हैं। युनेस्को ने साल 2013 में कुंभलगढ़ किले और इसकी दीवार को विश्व धरोहर में शामिल किया था। इस तरह महाराणा कुम्भा की विरासत अब संरक्षित की जा चुकी है।

 

  • इस किले की ऊँचाई के संबंध में अबुल फजल ने लिखा है कि “यह दुर्ग इतनी बुलंदी पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर की तरफ देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती है।”
  • कर्नल जेम्स टॉड ने दुर्भेद्य स्वरूप की दृष्टि से चित्तौड़ के बाद इस दुर्ग को रखा है तथा इस दुर्ग की तुलना (सुदृढ़ प्राचीर, बुर्जों तथा कंगूरों के कारण) ‘एट्रस्कन’ से की है।

कौन थे महाराणा कुंभा ? Who was Maharana Kumbha?

महाराणा कुंभा सिसोदिया राजवंश के  मेवाड़ के शासक थे। उन्होंने अपने जीवन में सैकड़ों युद्धों में खुद आगे रहकर अपनी सेना का मनोबल ऊपर रखा। ज्यादातर मौकों पर उन्हें जीत मिली। राजस्थान में कुल 84 किले मौजूद हैं। जिनमें से 32 अकेले महाराणा कुंभा ने बनवाये थे। चित्तौड़गढ़ के किले में स्थित कीर्ति स्तंभ भी महाराणा कुंभा ने ही सारंगपुर के युद्ध में महमूद खिलजी को हराने के बाद बनवाया था। इन्हीं महाराणा कुंभा के वंश में आगे चलकर राणा सांगा और महाराणा प्रताप जैसे कालजयी योद्धा हुए।

महाराणा कुंभा ने 1433 से 1468 तक मेवाड़ पर शासन किया। सन्1468 में सत्ता के अंधे उदयसिंह-प्रथम ने उनकी हत्या करके मेवाड़ की गद्दी पर कब्जा कर लिया। उदयसिंह राणा कुंभा का पुत्र था। आपकी जानकारी के लिए बता दें, यह उदयसिंह पन्ना धाय वाले उदय सिंह नहीं थे। जिनको पन्ना धाय ने बनबीर से बचाया था, वे उदय सिंह- द्वितीय थे। महाराणा प्रताप के पिता। उदय सिंह और बनबीर वाली घटना भी इसी कुंभलगढ़ के किले में घटित हुई थी। जिन्हें नहीं पता हो वे डॉ0 रामकुमार वर्मा की एकांकी दीपदान पढ़ सकते हैं।

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कहां स्थित है कुम्भलगढ़ का किला

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राजस्थान के राजसमंद जिले में महाराणा कुंभा का बनवाया गया किला मौजूद है। इस किले को अरावली की पहाड़ियों पर बनाया गया है। सामरिक दृष्टि से यदि देखा जाये तो अरावली की खड़ी पहाड़ियों पर स्थित होने के कारण यह सिर्फ एक मौके को छोड़कर अजेय रहा। ऊपर पहाड़ पर किला और नीचे सैकड़ों फीट गहरी खाई इसे दुश्मन की पकड़ से दूर ले जाती हैं। उदयपुर से सिर्फ 82 किलोमीटर दूर स्थित है कुंभलगढ़ का यह किला। आप सड़क के रास्ते आसानी से यहां पहुंच सकते हैं।

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दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दीवार भारत में है

कुंभलगढ़ किले की दीवार की लंबाई कितनी है?

चीन की दीवार के बारे में आप सभी जानते हैं कि यह दुनिया की सबसे बड़ी दीवार है। मुझे विश्वास है कि मेरी तरह आपको भी यह जानकर हैरत होगी कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी दीवार भारत में है। इस दीवार को भारत की महान दीवार भी कहा जाता है। यह कुंभलगढ़ किले की दीवार है। अरावली की 13 पहाड़ियों पर फैली इस दीवार की लंबाई 22 मील यानि की 36 किलोमीटर है। कुंभलगढ़ किले की दीवार की चौड़ाई 7 मी0 है। इस पर चार घुड़सवार एक साथ चल सकते हैं। कुंभलगढ़ किले की इस दीवार को एशिया की भी दूसरी सबसे बड़ी दीवार का रुतबा हासिल है।

कुंभलगढ़ किले में क्या देखें / kumbhalgarh-fort-history-in-hindi

बादल महल

बादल महल को बादलों का महल भी कहा जाता है। बादल महल दो मंजिला इमारत है। इसे महिलाओं और पुरुषों के लिए दो अलग-2 भागों में बांटा गया था। महल की दीवारें पेस्टल रंगों से सजाई गयी थी। जो दीवारों को विशेष आकर्षण देती थी। बादल महल महाराणा प्रताप से भी संबंधित है। उनका बचपन बादल महल में ही बीता था। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने काफी समय कुंभलगढ़ के किले में बिताया था। बादल महल अपनी जटिल संरचना के लिए जाना जाता था। वह कुछ इस तरह से बनाया गया था कि राजस्थान की तपती गर्मी में भी बादल महल की दोनों मंजिलें ठंड़ी रहती थी।

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साउंड एंड लाइट शो / Sound and Light show

कुंभलगढ़ के किले के इतिहास को  kumbhalgarh-fort-history-in-hindi जानने के लिए किले के अंदर ही साउंड एंड लाइट शो दिखाया जाता हैं। इस शो के जरिये आप किले के इतिहास को आसानी से समझ पायेंगे। इस साउंड और लाइट शो को आप हर शाम किले के अंदर देख सकते हैं।

  • टिकट- विदेशियों के लिए 400 रू भारतीयों के लिए मात्र 40 रू टिकट का मूल्य रखा गया है।
  • Opening Times: Sunrise until sunset, daily.

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य / Kumbhalgarh wild Life Santuary 

जैसा कि नाम से जाहिर है इस वन्यजीव अभ्यारण्य का नाम कुंभलगढ़ के ऐतिहासिक किले के नाम पर ही रखा गया है। किले के नीचे वाले भाग में स्थित जंगल को आजादी के बाद वन्यजीव अभ्यारण्य में संरक्षित कर दिया गया। इस अभ्यारण्य का मुख्य भाग करीब 225 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसके अंतर्गत लगभग 22 गांव आते हैं।

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य में पाये जाने वाले पशुओं में से कुछ संकटग्रस्त प्रजातियां भी हैं। बाकी यहां भारतीय लकड़बग्घे, तेंदुआ, ,नीलगाय, जंगली बिल्ल,  भेड़िया, चौसिंगा और  ,चिंकारा के अलावा भारतीय खरगोश पाये जाते हैं। किले से इस अभ्यारण्य की दूरी मात्र 3 किलोमीटर है।

भारत की शान के प्रतीक महाराणा कुंभा के इस किले कुंभलगढ़ kumbhalgarh-fort-history-in-hindi  को आपको एक बार जरूर देखना चाहिए।

By Rj Vivek

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9 thoughts on “kumbhalgarh-fort-history-in-hindi

  1. Santosh Kumar Singh

    भारत की शान के प्रतीक महाराणा कुंभा के इस किले कुंभलगढ़ की जानकारी को पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा।👍

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  2. Anjali rai

    काफी तथ्यात्मक लेख,धन्यवाद जानकारी देने के लिए

    Reply
    1. Vivek Singh Post author

      अंजलि जी अपना बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।

      Reply
  3. Mudit Shah

    बहुत अच्छी जानकारी दी है, विवेक भाई.

    Reply
  4. Worship

    Ticket rent for Indians is 10 percent less than foreigners.
    Glad to know that.

    Reply
    1. Vivek Singh Post author

      क्योंकि हमारी और उनकी आमदनी में इतना ही फर्क है।

      Reply
  5. एस एन पाण्डेय

    बहुत ही सुन्दर वर्णन।।।।।।।।।।।

    Reply

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