श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल, दुनिया का सबसे अमीर मंदिर

By | July 19, 2020

 श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर, केरल

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल

श्रीपद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल

दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कहे जाने वाले, देवताओं की धरती केरल में स्थित श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर इन दिनों फिर से सुर्खियों में है। कारण सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश जिसमें श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की सेवा का अधिकार एक बार फिर से त्रावनकोर राजपरिवार को सौंप दिया गया है। लेकिन उसे प्रबंधन के कार्यों से दूर रखा गया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें, सुप्रीम कोर्ट के 2011 के फैसले के पहले तक श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की एक 5 सदस्यी प्रबंध समिति होती थी। जिसका अध्यक्ष राजपरिवार का ही कोई सदस्य होता था।

तो इस बार mysolotraveler.com दुनिया के सबसे अमीर माने जाने वाले मंदिर के बारे में कुछ शानदार तथ्य लेकर हाजिर हैं। उम्मीद है आपको जरूर पसंद आएगा। आइए जानते हैं श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के बारे में..

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल का इतिहास

स्वयं ईश्वर की धरती कही जाने वाली केरल के श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के जिस वर्तमान स्वरूप को हम और आप देख रहे हैं, यह मूल मंदिर नहीं है। मूल मंदिर छठवीं या आठवीं शताब्दी में बना था।

इस मंदिर का जीर्णोद्धार साल 1733 में त्रावनकोर के राजा अनिड़ोम तिरुनाल राजा मार्तंड वर्मा ने करवाया था। राजा ने स्वयं को भगवान पद्मनाभ का सेवक स्वीकार करते हुए राजकीय छत्र, मुकुट, मणिकंध, पुरखों की तलवार और अपनी समस्त संपत्ति भगवान श्री पद्मनाभ के श्रीचरणों में अर्पित कर दी।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली थी, और उस पर एक मंदिर का निर्माण भी कराया गया था।

वर्तमान मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विश्राम कर रहे हैं। उनकी नाभि से कमलनाल निकली हुई है, इस कारण भगवान के इस स्वरूप को श्री पद्मनाभ स्वामी के नाम से जाना जाता है।

राजा मार्तंड वर्मा ने सन् 1729 से 1758 तक कुल 29 साल शासन किया। राजा मार्तंड वर्मा भारतीय इतिहास के उन चुनिंदा राजाओं में से एक हैं जिन्होने सीमित संसाधनों के बावजूद डचों को 1741 में समुद्र में पराजित किया।

राजा मार्तंड वर्मा ने डच कमांडर कैप्टन डी0 लेनॉय को त्रावनकोर की शाही सेना और राज्य के मछुआरों की मदद से हराया था। यह इतिहास की बहुत बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि 16वीं सदी के समय में युरोपीय नौसेनाओं को समुद्र में हराना असंभव माना जाता था।

शेषनाग को केरल में स्थानीय भाषा में अनन्त नाग भी कहा जाता है। यहां भगवान अनन्तशयनम् के नाम से भी विख्यात हैं। अनंतनाग के नाम से ही शहर का नाम तिरुअनन्तपुरम् कहा जाता है।

इतिहास की किताबों के पन्ने पलटने पर पता चलता है कि राजा मार्तंड वर्मा एक विष्णु भक्त राजा थे। वह स्वयं को पद्मनाभदास कहते थे। तभी से राजा मार्तंड के वंशजों ने भी स्वयं को भगवान पद्मनाभ स्वामी के सेवक के रूप में ही माना है। राजा मार्तंड ने अपनी सारी संपत्ति भगवान पद्मनाभ को दान कर दी थी। यह परम्परा आज तक बदस्तूर कायम है।

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की बनावट

एक तरफ लहराता अरब सागर और दुसरी तरफ पश्चिम घाट की मनमोहक पहाड़ियां। इनके बीच में स्थित श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की बनावट या स्थापत्य कला केरल और द्रविड़ शैली का बेजोड़ संगम है। मंदिर का गोपुरम द्रविड़ शैली में बना है। सात मंजिला ऊंची विशाल इमारत कारीगरी का अद्भुत नज़ारा पेश करती है। मंदिर के गलियारों में बारीक नक्काशी किए हुए खंभे हैं।

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के चारों तरफ ऊंचे परकोटे{ चहरदीवारी} बनी हुई है।जो मंदिर की सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई थी। इस मंदिर के परिसर में ही एक सरोवर है, जिसे पद्मतीर्थ कुलम् कहा जाता है।

 

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल, दुनिया का सबसे अमीर मंदिर 1 श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल, दुनिया का सबसे अमीर मंदिर

                                                                    पद्मतीर्थ कुलम – मंदिर का सरोवर

श्री पद्मननाभ स्वामी मंदिर का ड्रेसकोड

दुनिया के सबसे अमीर मंदिर के रूप में प्रसिद्ध श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल के इस मंदिर के अपने कुछ नियम और कायदे है। जिनमें से एक कि इस मंदिर में सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश मिलता है।

मंदिर में प्रवेश के लिए एक ड्रेसकोड निर्धारित है, जिसके अनुसार पुरुषों के धोती और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है। ये सारे वस्त्र बिना सिले होने चाहिए। यह नियम यहां काम करने वाले पुलिस बलों और सुरक्षा कर्मियों पर भी लगता है।

इस तरह श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है, जिनके स्वयं के कुछ नियम है। जिन्हें श्रद्धालुओं को मानना पड़ता है।

मंदिर में मनाए जाने वाले उत्सव

केरल के श्री पद्मनाभ मंदिर में साल में दो बार उत्सव मनाया जाता है। पहली बार मार्च- अप्रैल में और दूसरी बार अक्टूबर- नवम्बर में उत्सव मनाया जाता है। इन उत्सवों में शामिल होने के लिए पूरे भारत से श्रद्धालु आते हैं।

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की संपत्ति

जिस मंदिर को दुनिया का सबसे अमीर मंदिर माना जाता है। वास्तव में उसका आधार क्या है? साल 2011 से पहले श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की अमीरी का सिर्फ अनुमान लगाया जाता था, लेकिन केरल हाई कोर्ट के आदेश के बाद मंदिर के तहखानों में बंद खजाने की जांच का आदेश दिया गया। कोर्ट ने इस कार्य के लिए पुरातत्व विभाग और फायर ब्रिग्रेड को निर्देशित किया।

जांच में पाया गया कि मंदिर में कुल सात तहखाने हैंं। जिनमें से खोले गये 6 तहखानों में तकरीबन 2 लाख करोड़ रू का खजाना निकला है। जबकि इसका सातवां तहखाना अभी खोला जाना बाकी है। सातवें तहखाने में इससे भी बड़ा खजाना होने का अनुमान है।

दक्षिण भारत के मंदिरों के विषय में जानकारी रखने वाले इतिहासकारोें के अनुसार मंदिर के ज्ञात खजानें से करीब 10 गुना खजाना अभी भी अज्ञात है। बेशकीमती हीरे-जवाहरात, और बहुमूल्य पत्थरों का दाम लगाना मुश्किल है। इस तरह श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के दुनिया के सबसे अमीर मंदिर होने के दावे को और बल मिलता है।

 Forbes Magazine  ने भी श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की  कुल संपत्ति का  आकलन  लगभग  75 लाख करोड़  यानि 1 ट्रिलियन डॉलर के बराबर आंकी थी।

बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही सातवें तहखाने को खोलने पर तक रोक लगा दी गयी है। साथ ही प्रधान कोर्ट ने यह भी कहा कि यह खजाना मंदिर की संपत्ति है। मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही राज परिवार के अधिकार को भी मान्यता मिल गयी है।

क्या है श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के सातवें दरवाजे का रहस्य

 

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल, दुनिया का सबसे अमीर मंदिर 2 श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल, दुनिया का सबसे अमीर मंदिर

                                                                     कोबरा द्वार, श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल के जिस सातवें दरवाजे को लेकर इतना रहस्य है। क्या वाकई वह इतना रहस्यमयी है? वास्तव में मंदिर के इस दरवाजे को कोबराद्वार या नागद्वार कहा जाता है।

इस दरवाजे पर कोई कब्जा या किसी तरह का बेलन इत्यादि नहीं लगा है। स्टील की मोटी चादर के बने दरवाजे पर दो नाग लिपटे हैं। ऐसी मान्यता है कि वे इस दरवाजे की हिफाजत कर रहे हैं।

प्रचलित कहानियों में बताया जाता है कि कुछ लोगों ने पहले भी इस दरवाजे को खोलने की कोशिश की लेकिन सांप डसने से उनकी मौत हो गई। तब से किसी ने भी इसे खोलने का प्रयास नहीं किया। यहां तक कि मुगलों और अंग्रेजों ने भी कभी इसे खोलने का प्रयास नहीं किया।

साल 1908 और 1931 में कुछ लोगों ने इसे खोलने का प्रयास किया, बताया जाता है कि तब हजारों की संख्या में नागों ने लोगों पर हमला कर दिया कुछ लोगों की मृत्यु भी हो गयी थी। इसके बाद किसी ने भी इसे खोलने का प्रयास नहीं किया।

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका करने वाले टी0पी0 सुन्दर राजन की भी मृत्यु हो गयी। वह पहले बीमार पड़े और बाद में चल बसे। इस घटना के बाद लोगों का विश्वास और पक्का हो गया कि मंदिर के सातवें दरवाजे का कोई राज़ है, जो लोग अभी समझ नहीं पा रहे हैं।

मंत्रो से खुल सकता है सातवां दरवाजा

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के पुजारियों में से एक बताते हैं कि सातवें द्वार को नाग बंधम् या नागपाशम् मंत्र के द्वारा बांधा गया है। इसे सिर्फ गरुण मंत्र के सटीक और स्पष्ट उच्चारण के द्वारा किसी पवित्र व्यक्ति द्वारा ही खोला जा सकता है।

जरा सी भी असावधानी या गलती मृत्यु का कारण बन सकती है। अब तक के ज्ञात इतिहास में किसी भी योगी या सिद्ध पुरुष के द्वारा यह दावा नहीं किया जा सका है कि वह दरवाजे को खोल सकते हैं।

कैसे पहुंचे

वैसे तो श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर तिरुअनंतपुरम शहर मे ही स्थित है। मुख्य शहर से मंदिर की दूरी 2 किमी0 है। देश लगभग हर भाग से यहां के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा है। आप चाहे तो अपने साधन से भी यहां पहुंच सकते हैं।

धन्यवाद

#Rj Vivek

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13 thoughts on “श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर केरल, दुनिया का सबसे अमीर मंदिर

  1. Santosh Kumar Singh

    इतिहास एवं पर्यटन में रूचि रखने वाले लोगों के लिए बेहद सटीक जानकारी।👍👍

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    1. Vivek Singh Post author

      कोशिश करेंगे कभी आपको वहां घूमने का भी मौका मिले।

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  2. Jasmine

    Ab to mann hi kar gaya ki ek baar Darshan karke aaye’n 🙏

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