sindu nadi jal vivad kya hai

By | September 19, 2020

सिंधु नदी जल विवाद क्या है?/sindu nadi jal vivad kya hai.(19 सित0 1960-2020)

What is Indus water treaty?/ सिंधु नदी का जल समझौता क्या है?

सिन्धु नदी जल विवाद: टकराव के 60 साल

दुनिया घूमने वाले घुमक्कड़ों ने सिंधु नदी को बहुत करीब से देखा और सुना होगा। सुना इस वजह से क्योंकि हमारे जैसे लोग नदियों की धारा, पहाड़ों की खामोशी और बियाबान के संन्नाटे को महसूस कर लेते हैं। आपने भी सिंधु नदी का जल विवाद क्या है, सुना और पढ़ा होगा। जिस नदी के नाम पर युनानियों ने हमारे देश का नाम इंडिया रख दिया। इसी तरह ईरानियों ने सिंधु नदी को हिंदु कहना शुरु किया क्योंकि फारसी में स को ह कहा जाता है। तो सिंधु नदी के इस पार रहने वाले लोगों को हिंदू और हिंदुओं के रहने के जगह को हिंदुस्तान कहा गया।

sindu nadi jal vivad kya hai

                                                                                    सिंधु नदी

बचपन से ही हमें इस नदी घाटी की सभ्यता यानि की सिंधु घाटी की सभ्यता के बारे में किताबों में पढ़ाया जाता है। आपने भी जरूर पढ़ा होगा। हड़प्पा और मोहनजोदाड़ो को कैसे भूल सकते हैं। मोहनजोदाड़ो के नाम से रितिक रोशन की वो पीरियड फिल्म भी आपने जरूर देखी होगी। लेकिन आज हम सिंधु नदी के जल विवाद को लेकर बात करेंगे। आज यानि 19 सितंबर 2020 को इस विवाद के 60 साल पूरे हो गये हैं।

महान हिमालय पर्वत के पश्चिम में बहती है सिंधु नदी, अनादि काल से भारत की जीवन रेखा। सिंधु यानि कि वो नदी जिसके नाम पर हमें इतिहास की किताबों में सभ्यता पढ़ाई जाती है, जिसे हम सिन्धु घाटी सभ्यता (Indus valley Civilizatoin) के नाम से जानते हैं। जो नदी कभी पुरानी दुनिया की सभ्यताओं में अपनी नगरीय सभ्यता के लिए जानी जाती थी। वो पिछले 60 सालों से भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के विवाद के कारण चर्चा में है।

तिब्बत में मानसरोवर के पास  सिन-का-बाब  से निकलने वाली तथा पाँच सहायक नदियों वाली सिन्धु नदी के पानी को लेकर चला आ रहा विवाद आज 60 साल पुराना हो गया है। विवाद की जड़ें गुजरते वक्त के साथ और गहरी होती गयी हैं। झेलमचिनावरावीव्यास एवं सतलुज सिंधु नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। निष्कर्ष अभी तक नहीं निकला।

सिन्धु नदी का क्षेत्रफल लगभग 11.2 लाख किमी है। जिसका 47 प्रतिशत पाकिस्तान, 39 प्रतिशत भारत,8 प्रतिशत चीन और 6 प्रतिशत भाग अफगानिस्तान में पड़ता है। इस पूरे क्षेत्र में तकरीबन 30 करोड़ लोग रहते हैं।

आखिर इस पूरे विवाद का कारण क्या था ? sindu nadi jal vivad kya hai


अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी की वेवसाइट पर इस समझौते की पूरी कहानी ऐरॉन वोल्फ़ और जोशुआ न्युटन की केस स्टडी में पता चलती है। स्टैंड स्टिल संधि 1947-48 के तहत भारत के पानी रोकने से पाकिस्तानी पंजाब के 17 लाख एकड़ जमीन के हालात बदतर हो गये। बाद में 4 मई 1948 को पुनः आपूर्ति बहाल कर दी गयी।


सन् 1951 में प्रधानमंत्री नेहरू ने टेनसी वैली अथॉरिटी Tennessee Valley Authority के पूर्व प्रमुख डेविड लिलियंथल( David Lilienthal,) को भारत बुलाया। लिलियंथल पाकिस्तान भी गये। वापस जाकर उन्होंने सिन्धु जल बंटवारे पर एक लेख लिखा।इसे विश्व बैंक प्रमुख और लिलियंथल के मित्र यूजीन ब्लैक(Eugene R. Black) ने भी पढ़ा। इसके बाद ब्लैक ने दोनों देशों के प्रमुखों से संपर्क किया।फिर बैठकों का सिलसिला एक दशक तक चलता रहा।19 सितम्बर 1960 को कराची में प्रधानमंत्री नेहरू और उनके पाकिस्तानी समकक्ष तत्कालीन राष्ट्रपति फील्डमार्शल मो. अयूब खान के मध्य सिंधु नदी का जल समझौता हुआ। इस समझौते में 12 धाराएं और A से H तक परिशिष्ट हैं।

sindhu nadi jal vivad kya hai

सिंधु नदी जल विवाद के समय नेहरू और अयूब खान

sindu nadi jal vivad kya hai


समझौते की धारा 2 के तहत सिन्धु और इसकी सहायक नदियों को दो भागों, पूर्वी और पश्चिमी में बांटा गया। पूर्वी भाग की नदियों सतलज,रावी और व्यास का पानी भारत बिना रोक प्रयोग कर सकता है। जबकि पश्चिमी भाग की नदियों झेलम, चिनाब और सिन्धु का जल पाकिस्तान को दिया गया।

भारत धारा 3 के अनुसार बिजली बनाने और 7 लाख एकड़ कृषि भूमि के लिये पानी का उपयोग कर सकता है। किसी तरह के विवाद की स्थिति से निपटने के लिए स्थायी सिन्धु आयोग की स्थापना की गयी। आयोग के स्तर पर हल न निकलने की स्थिति में सरकारें बातचीत करेंगी। वे चाहे तो कोर्ट ऑफ ऑर्बिट्रेशन की सहायता ले सकती हैं।

भारत अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को दे सकता है यह अवधि 1अप्रैल 1960 से 31मार्च 1970 तक ही थी, जिसे किसी भी हालत में 31मार्च 1973 से आगे नहीं बढ़ावा जा सकता।


भारत तुलबुल परियोजना के तहत 2880 किमी लंबी इस नदी के 20 प्रतिशत पानी को 3 लाख 60 हज़ार फुट पानी के रूप में भंडारित कर सकता है।
ब्रह्म चेलानी ‘The Hindu के अपने लेख में कहते है “भारत ने 1960 में ये सोच के समझौता किया था कि पानी के बदले उसे शान्ति मिलेगी लेकिन अमल के पांच साल बाद ही पाक ने 1965 में जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया। चीन पीओके में डैम बना रहा है। पाक भारत की छोटी परियोजनाओं पर आपत्ति कर रहा है।”


चेलानी आगे कहते हैं कि बड़े देश अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता की बात नहीं करते या ट्राईब्यूनल की बात नहीं मानते जैसा की चीन दक्षिणी चीन सागर में कर रहा है।


अंततः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उड़ी हमले के बाद का बयान” खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते! वाकई विचार करने का विषय है। यह बात प्रधानमंत्री ने आज से तीन साल पहले 2017 में कही थी, जब दुनिया में कोरोना का वैश्विक संकट नहीं था। मौका मिले तो सिंधु नदी का दर्शन जरूर करें। सिंधु नदी का ऋग्वेद में करीब 176 बार जिक्र किया गया है।

 हमारे अन्य ब्लॉग नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करके पढ़ें..

 धन्यवाद

विवेक सिंह

4 thoughts on “sindu nadi jal vivad kya hai

  1. Vikas Singh

    बहुत ही रोचक और महवपूर्ण जानकारी, हर भारतीय को इस विषय की जानकारी होना चाहिए।

    Reply
  2. Vikas Singh

    बहुत ही मत्वपूर्ण और रोचक जानकारी

    Reply
  3. दीपक चंदेल

    पाकिस्तान एक दुष्ट पड़ोसी है। उसे पानी नहीं देना चाहिए। जरूरी नहीं कि उसे गोली से ही जवाब दिया जाए, हमारे पास अन्य विकल्प भी है। पानी बंद होते ही घुटनों पर आ जाएगा।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *